ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट…. कम जगह, ज्यादा मेहमान, ताबड़तोड़ सात हजार रजिस्ट्रेशन रद्द
भोपाल: ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की व्यवस्थाओं और प्लानिंग की परतें उधेड़ने लगी हैं। 7 हजार रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिए गए। कुल 32 हजार रजिस्ट्रेशन में से 7 हजार को जांच के बाद निरस्त कर दिया गया। अब 25 हजार मेहमानों को प्रवेश मिलेगा। ये रजिस्ट्रेशन समिट से एक दिन पहले निरस्त किए गए। जानकारी के मुताबिक 24 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उद्घाटन सत्र के दौरान आयोजन स्थल मानव संग्रहालय में सिर्फ 5 हजार उद्योगपति ही मौजूद रहेंगे। इनमें अडानी, बिड़ला जैसे देश के शीर्ष उद्योगपति शामिल हैं।
समिट के लिए कुल 32 हजार रजिस्ट्रेशन हुए थे। पिछले 3 दिन में 10 हजार से ज्यादा रजिस्ट्रेशन होने के कारण एक दिन पहले विंडो बंद करनी पड़ी। ज्यादा रजिस्ट्रेशन होने के बाद समिट की योजना में भी बदलाव करना पड़ा। मप्र राज्य औद्योगिक विकास निगम के मुताबिक समिट में 20 हजार मेहमानों को शामिल करने का लक्ष्य था। ज्यादा रजिस्ट्रेशन होने के कारण इनकी जांच की गई। जिसमें 7 हजार रजिस्ट्रेशन निरस्त किए गए हैं। अब शेष बचे 25 हजार उद्योगपतियों को ही कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति दी जाएगी।
4 दिनों तक 4 मापदंडों पर जांच जारी रही, लेकिन मामला अभी भी अटका हुआ
अधिकारियों के अनुसार, जांच इसलिए की गई, क्योंकि लक्ष्य से 50 फीसदी अधिक रजिस्ट्रेशन हो गए थे। इसमें कंपनी का सालाना टर्नओवर, उद्योग, किस क्षेत्र में निवेश की इच्छा और पिछले 5 साल की पृष्ठभूमि देखी गई। 7 हजार रजिस्ट्रेशन इस मापदंड पर खरे नहीं उतरे। इस कारण इन्हें निरस्त कर दिया गया है।
पंजीकरण का आंकड़ा भले ही फाइनल हो गया हो, लेकिन एक ही समय में 25 हजार मेहमानों को समिट स्थल पर ठहरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। योजना इस तरह तैयार की जा रही है कि उद्योगपति अलग-अलग समय पर पहुंचें। मंजूरी मिलते ही उन्हें ई-मेल के जरिए 'ओके' और एंट्री कार्ड भेजे जा रहे हैं।
वोटर लिस्ट विवाद: मालदा में न्यायिक अधिकारियों पर बंधक बनाकर विरोध प्रदर्शन
बंगाल में शाह का दावा: ममता सरकार की विदाई तय
सत्र 2026-27 से लागू होगा नया CBSE सिलेबस, छात्रों को करना होगा ध्यान
जमीन विवाद के बीच बना सरकारी भवन, अब उपयोग पर उठे सवाल
भर्ती प्रक्रिया निरस्त: हाई कोर्ट बोला- फिर से जारी करें प्लाटून कमांडर का विज्ञापन
सीधे संपर्क का मामला, HC ने पूछा- क्यों न हो कार्रवाई?
डॉ. मोहन यादव का बड़ा हमला: ममता बनर्जी अब ‘दीदी’ नहीं, ‘अप्पी
कोर्ट ने शराब घोटाला मामले में फैसला सुरक्षित रखते हुए सुनवाई पूरी की
कर्मचारियों की सुनने की क्षमता प्रभावित, उज्जैन कंपनी में चिंता का माहौल