यहां दर्शन मात्र से दूर होते हैं नेत्र रोग, गोंडा के इस शक्तिपीठ में प्रतिमा की नहीं सुरंग की होती है पूजा
देश भर में मां सती के 51 शक्तिपीठ मंदिर स्थित हैं और हर मंदिर की अपनी आस्था और पौराणिक इतिहास है. ऐसा ही एक मंदिर उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में स्थित है, जहां मान्यता है कि मां के दर्शन करने के बाद पानी नेत्रों पर लगाने से आंखों के रोगों से मुक्ति मिलती है. यही कारण है कि मंदिर पूर्वांचल यूपी में आस्था और विश्वास का बड़ा केंद्र है. हम बात कर रहे हैं मां बाराही मंदिर की. मां का मंदिर हजारों साल पुराना है और आस्था भी उतनी ही मजबूत. इस मंदिर में पूजा-अर्चना करने से ना केवल रोगों से मुक्ति मिलती है बल्कि माता अपने भक्तों की कई इच्छाएं पूरी भी करती हैं. आइए जानते हैं माता सती के इस शक्तिशाली शक्तिपीठ के बारे में…
मां बाराही देवी का मंदिर
मंदिर में मां बाराही देवी की प्रतिमा बड़े विशाल पत्थर के रूप में विराजमान है. पत्थर के नीचे एक छोटी सी जगह है, जहां निरंतर मां की ज्योति जलती रहती है. गर्भगृह में मां दुर्गा की अष्टभुजी प्रतिमा भी मौजूद है. मां बाराही देवी का शृंगार रोजाना लाल वस्त्रों और चूड़ियों से किया जाता है. यहां मां की कोई प्रतिमा मौजूद नहीं है, बल्कि सुरंग की पूजा की जाती है.
नेत्र रोग से मुक्ति दिलाती हैं माता
पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी स्थल पर मां सती का जबड़ा गिरा था, जिसके बाद शक्तिपीठ मंदिर की स्थापना हुई. मां बाराही देवी को उत्तरी भवानी के नाम से भी जाना जाता है. स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, अगर कोई आंखों के रोगों से पीड़ित है या किसी की आंखों की रोशनी चली गई है, तो माता जी के स्थान पर चढ़ाया हुआ दूध या फिर मंदिर परिसर में मौजूद वट वृक्ष का नीर आंखों में डालने से नेत्र रोगों से मुक्ति मिलती है. भक्त इसे मां की विशेष कृपा मानते हैं.
संतान सुख के लिए मां बाराही के दर्शन
इसके साथ ही अगर कोई संतान सुख से वंचित है, तब भी मां के दर्शन मात्र से ही महिला की सूनी गोद भर जाती है. स्थानीय किवदंती के अनुसार, मां ने उस महिला की भी गोद भरी थी, जिसके पास बच्चेदानी नहीं थी. इसी किवदंती की वजह से महिलाएं संतान सुख पाने के लिए भी मां बाराही के दर्शन के लिए आती हैं. मनोकामना पूर्ति के बाद मंदिर में विशेष अनुष्ठान भी कराती हैं.
मंदिर में भक्तों की हमेशा रहती है भीठ
चैत्र और शारदीय नवरात्र में मां के मंदिर में विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं और भक्तों की भारी भीड़ भी दर्शन के लिए पहुंचती है. इसके साथ ही सोमवार और शुक्रवार को मंदिर में खासकर काफी भक्तजन आते हैं, क्योंकि ये दोनों ही मां बाराही को समर्पित माने जाते हैं. मां बाराही शक्तिपीठ को 51 शक्तिपीठों में से 34वां शक्तिपीठ माना जाता है. यहां पूजा अर्चना करने से ऊपरी बाधाओं और बुरी शक्तियों से मुक्ति मिलती है. साथ ही भक्तों की हर इच्छा भी पूरी होती है.
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