निशाने पर सहयोगी संगठन: जनताना सरकार और महिला मुक्ति मंच समेत 6 गुटों पर शासन की सख्ती।
छत्तीसगढ़ में माओवादी और 6 सहयोगी संगठनों पर प्रतिबंध एक साल और बढ़ा
रायपुर|छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में नक्सली गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए कड़ा रुख अपनाते हुए कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) और उसके 6 फ्रंट संगठनों पर लगे प्रतिबंध की अवधि को एक वर्ष के लिए विस्तारित कर दिया है। गृह विभाग द्वारा इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है।
ये संगठन रहेंगे प्रतिबंधित बैन किए गए संगठनों की सूची में सीपीआई-माओवादी के अलावा दंडकारण्य आदिवासी किसान मजदूर संघ, क्रांतिकारी आदिवासी महिला संघ, क्रांतिकारी आदिवासी बालक संघ, क्रांतिकारी किसान कमेटी, महिला मुक्ति मंच और आरपीसी (जनताना सरकार) शामिल हैं। राज्य सरकार ने इन सभी को 'छत्तीसगढ़ विशेष जन सुरक्षा अधिनियम 2005' के अंतर्गत विधि विरुद्ध घोषित किया है।
12 अप्रैल से लागू होंगे नियम सरकार की यह नई अधिसूचना 12 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी और आगामी एक वर्ष तक लागू रहेगी। शासन का मानना है कि इन संगठनों की गतिविधियां न केवल राज्य की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं के कार्यों में भी गंभीर बाधा उत्पन्न कर रही हैं।
कैडर भर्ती पर थी नजर सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, ये संगठन विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं के बीच माओवादी विचारधारा का विस्तार करने और नए कैडर की भर्ती करने में सक्रिय थे। क्रांतिकारी आदिवासी महिला संघ जैसे संगठन आदिवासी महिलाओं को संगठित कर उन्हें मुख्यधारा से काटने का प्रयास कर रहे थे, जिसे देखते हुए यह प्रतिबंध आगे बढ़ाया गया है।
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