हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: सरकारी अनुबंध के चलते नामांकन निरस्त करना वैध
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सीतापुर से भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो के खिलाफ दायर चुनाव याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस संजय के. अग्रवाल की एकल पीठ ने यह फैसला आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी मुन्ना लाल टोप्पो की याचिका पर सुनाया। याचिकाकर्ता ने रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा अपना नामांकन पत्र निरस्त किए जाने को अदालत में चुनौती दी थी।
सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि याचिकाकर्ता ने स्वयं अपने शपथ पत्र में शासन के साथ अनुबंध (कांट्रैक्ट) होने की बात स्वीकार की थी। जल जीवन मिशन के तहत यह अनुबंध जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 9A के तहत अयोग्यता का आधार बनता है। अदालत ने माना कि रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा नामांकन निरस्त करने की प्रक्रिया पूरी तरह वैध थी। हाई कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता अपने ही बयानों से पीछे नहीं हट सकता।
“भाजपा की ऐतिहासिक जीत का जश्न, मोहन यादव और हेमंत खंडेलवाल रहे शामिल”
हार-जीत लोकतंत्र का हिस्सा: पीएम मोदी का विपक्ष को बड़ा संदेश
पश्चिम बंगाल प्रशासन सख्त, कागजात हटाने पर रोक
ड्रग्स सिंडिकेट पर शिकंजा, सलीम डोला की गिरफ्तारी से बड़ा नेटवर्क उजागर
असम चुनाव परिणाम: NDA की जीत पर हिमंत सरमा का विजय चिन्ह
अप्रैल में भोपाल मंडल का सख्त अभियान, 63 हजार से अधिक केस पकड़े
बंगाल फतह के बाद अनोखा सेलिब्रेशन, भाजपा सांसद का खास अंदाज
11 दिनों की मशक्कत के बाद बुझी जापान की आग, हालात काबू में
BJP ने असम में रचा इतिहास, तमिलनाडु में TVK ने बिगाड़ा समीकरण