अक्षय तृतीया की तारीख को लेकर कंफ्यूज हैं? ये है सही तिथि, शुभ मुर्हूत, इस बार इन नक्षत्रों के कारण बेहद खास
अप्रैल का महीना शुरू होते ही वातावरण में उत्साह और आस्था की एक अलग ही लहर देखने को मिलती है, क्योंकि इस महीने में कई महत्वपूर्ण पर्व और त्योहार आते हैं. इन्हीं में से एक अत्यंत शुभ और पवित्र पर्व है अक्षय तृतीया, जिसे सनातन धर्म में विशेष स्थान प्राप्त है. मान्यता है कि इस दिन किए गए हर शुभ कार्य का फल कभी समाप्त नहीं होता, बल्कि वह अक्षय यानी अनंत होता है.
इस दिन नहीं होती मुर्हूत देखने की जरूरत
यही कारण है कि लोग इस दिन नए कार्यों की शुरुआत, खरीदारी, दान-पुण्य, विवाह और धार्मिक अनुष्ठानों को बिना किसी संकोच के करते हैं. इस दिन को अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है, यानी ऐसा दिन जब किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं होती. तो चलिए देवघर के ज्योतिषाचार्य से जानते हैं कि कब है अक्षय तृतीया, क्या है शुभ मुहूर्त और क्या बन रहा है खास शुभ योग?
क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य
अक्षय तृतीया का पर्व वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है. इस वर्ष तिथि की गणना के अनुसार तृतीया 19 अप्रैल को पड़ रही है, लेकिन उदया तिथि 20 अप्रैल को होने के कारण अक्षय तृतीया का पर्व 20 अप्रैल को ही मनाया जाएगा. हिंदू पंचांग में उदया तिथि का विशेष महत्व होता है, इसलिए पर्व-त्योहार उसी दिन मनाए जाते हैं जब तिथि सूर्योदय के समय विद्यमान रहती है. यही वजह है कि इस बार अक्षय तृतीया 20 अप्रैल को पूरे विधि-विधान के साथ मनाई जाएगी.
क्या रहेगा पूजा का शुभ मुहूर्त
इस दिन पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों के लिए विशेष शुभ समय भी निर्धारित है. प्रातःकाल 05 बजे से लेकर दोपहर 12:20 बजे तक का समय अत्यंत शुभ माना गया है. इस दौरान मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है. मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि, धन-वैभव और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है. साथ ही इस दिन सोना-चांदी खरीदना भी अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि इसे भविष्य में समृद्धि और स्थिरता का प्रतीक समझा जाता है.
बन रहे हैं बेहद शुभ योग
अक्षय तृतीया का महत्व इस वर्ष और भी बढ़ गया है, क्योंकि इस दिन कई शुभ योगों का संयोग बन रहा है. इस दिन रोहिणी नक्षत्र का संयोग रहेगा, जो स्वयं में अत्यंत शुभ माना जाता है. इसके साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का भी निर्माण हो रहा है, जो किसी भी कार्य को सफल और फलदायी बनाने के लिए श्रेष्ठ माने जाते हैं.
इन योगों के प्रभाव से इस दिन किए गए कार्यों में सफलता की संभावना कई गुना बढ़ जाती है. यही कारण है कि इस दिन लोग नए व्यापार, निवेश, गृह प्रवेश और विवाह जैसे बड़े निर्णय लेने में भी संकोच नहीं करते.
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