क्रिसिल की रिपोर्ट: रेयर-अर्थ संकट के बाद 2026-27 में 18% तक उछाल संभव, ई-दोपहिया बिक्री में फिर आएगी रफ्तार?
दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति में सुधार से देश में इलेक्ट्रिक दोपहिया (ई-दोपहिया) वाहनों की बिक्री अगले वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान 16-18 फीसदी बढ़ सकती है। हालांकि, चालू वित्त वर्ष 2025-26 में आपूर्ति शृंखला बाधाओं के कारण ई-दोपहिया वाहनों की बिक्री में वृद्धि 12-13 फीसदी तक सीमित रह सकती है। क्रिसिल रेटिंग्स ने एक रिपोर्ट में कहा, चालू वित्त वर्ष इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की वृद्धि अस्थायी रूप से दुर्लभ खनिजों (रेयर-अर्थ मैग्नेट) की आपूर्ति में व्यवधान और आंतरिक दहन इंजन (आईसीई) मॉडलों पर जीएसटी युक्तिकरण के कारण धीमी रह सकती है।हालांकि, हाल के महीनों में ई-दोपहिया वाहनों की बिक्री में सुधार हुआ है। वित्त वर्ष 2024-25 में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री में वृद्धि की रफ्तार 22 फीसदी रही थी। क्रिसिल रेटिंग्स के वरिष्ठ निदेशक अनुज सेठी ने कहा, दुर्लभ खनिजों की कमी से उत्पन्न आपूर्ति व्यवधान ने साल के मध्य में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री को प्रभावित किया।
खनिज की उपलब्धता में सुधार
जैसे-जैसे इन खनिजों की उपलब्धता में सुधार हुआ और आईसीई मॉडल में जीएसटी कटौती के साथ मूल्य में संशोधन हुआ, मूल उपकरण विनिर्माता (ओईएम) कंपनियों ने ग्राहकों को कीमतों में छूट दी। साथ ही, कम कीमत वाले इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के मॉडल पेश किए, ताकि आईसीई-ईवी मूल्य अंतर को कम किया जा सके।
62% बाजार पर पुरानी कंपनियों का दबदबा
क्रिसिल रेटिंग्स की निदेशक पूनम उपाध्याय ने कहा, पुरानी कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी एक साल पहले के 47 फीसदी से बढ़कर जनवरी, 2026 तक 62 फीसदी पहुंच गई। यह नई कंपनियों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन है। बाजार हिस्सेदारी में यह बढ़ोतरी पुरानी कंपनियों के मजबूत डीलर नेटवर्क और आपूर्ति तंत्र के साथ एंट्री-लेवल और मिड-प्राइस इलेक्ट्रिक मॉडल की बढ़ी हुई रेंज को दिखाती है। विश्वसनीयता और सर्विस महत्वपूर्ण कारण बने हुए हैं, जहां पुरानी ओईएम कंपनियां अभी अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं।
चलाने की कम लागत से बढ़ रहा ओनरशिप
रिपोर्ट में कहा गया है कि जीएसटी दरों में कटौती से आईसीई गाड़ियों की खरीदने की लागत तो घटी है, लेकिन चलाने की लागत के मामले में ई-दोपहिया वाहन बेहतर हैं। इनकी चलाने की लागत करीब 3 पैसे/किमी है, जबकि आईसीई गाड़ियों के लिए यह 2-2.5 रुपये/किमी है। इससे कुल ओनरशिप लागत में ई-दोपहिया वाहनों का फायदा बना हुआ है, भले ही सब्सिडी कम हो रही हो।
दबाव झेलने में भी पुरानी कंपनियां बेहतर स्थिति में
रेटिंग एजेंसी ने कहा, 16-18 फीसदी की अनुमानित वृद्धि को संस्थागत ओनरशिप-कॉस्ट एडवांटेज का समर्थन मिल रहा है। हालांकि, प्रतिस्पर्धी दबाव अलग-अलग जोखिम पैदा कर रहे हैं, जिसमें पुराने खिलाड़ी (कंपनियां) बेहतर स्थिति में हैं, जबकि नए खिलाड़ियों को कमजोर यूनिट-व्हीकल इकनॉमिक्स का सामना करना पड़ रहा है।
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