कांग्रेस सरकार के सर्वे में ही राहुल के दावे फेल, कर्नाटक में जनता ने ईवीएम पर जताया भरोसा
बैंगलुरु, कर्नाटक की कांग्रेस सरकार द्वारा कराए गए एक आधिकारिक सर्वे के नतीजों ने देश में ईवीएम की विश्वसनीयता पर चल रही बहस को नया मोड़ दे दिया है। सर्वे के मुताबिक कर्नाटक की जनता का एक बड़ा हिस्सा ईवीएम से चुनाव को सुरक्षित और सटीक मानता है। इन नतीजों के सामने आने के बाद बीजेपी ने राहुल गांधी के वोट चोरी वाले आरोपों को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला है। इस सर्वे को कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के जरिए कराया गया था। इसमें 102 विधानसभा क्षेत्रों के 5,100 लोगों की राय ली गई।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सर्वे में शामिल 83.61फीसदी लोगों ने कहा कि वे ईवीएम को भरोसेमंद मानते हैं। 69.39फीसदी लोग इस बात से सहमत थे कि ईवीएम सटीक परिणाम देती है, जबकि 14.22फीसदी ने इस पर अपनी पूर्ण सहमति जताई। ईवीएम को लेक कलबुर्गी में सबसे ज्यादा भरोसा देखा, जहां 94.48 लोग वोटिंग मशीन के पक्ष में थे। मैसूर में 88.59फीसदी लोगों ने इसकी विश्वसनीयता पर मुहर लगाई। बेंगलुरु में भी 63.67फीसदी लोग इससे सहमत थे।
सर्वे के नतीजे सार्वजनिक होते ही बीजेपी ने इसे कांग्रेस के लिए शर्मिंदगी का विषय बताया। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने एक्स पर लिखा- सालों से राहुल गांधी देश भर में एक ही कहानी सुना रहे हैं कि भारत का लोकतंत्र खतरे में है और ईवीएम अविश्वसनीय है। लेकिन खुद कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के सर्वे ने एक अलग कहानी बयां की है। यह कांग्रेस के मुंह पर तमाचा है।
बीजेपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल हारने पर संस्थाओं पर सवाल उठाती है और जीतने पर उसी सिस्टम का जश्न मनाती है। उन्होंने इसे सुविधा की राजनीति करार दिया। यह सर्वे ऐसे समय में सामने आया जब सीएम सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को बैलेट पेपर से कराने का प्रस्ताव दिया है। सरकार का तर्क है कि जनता का ईवीएम से भरोसा कम हो रहा है। बीजेपी ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि जब उनका अपना सर्वे जनता का भारी भरोसा दिखा रहा है, तो सरकार राज्य को पीछे की ओर क्यों ले जा रही है?
बता दें राहुल गांधी ईवीएम की पारदर्शिता पर सवाल उठाते रहे हैं। लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान भी उन्होंने ब्लैक बॉक्स और वोट चोरी जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की आलोचना की थी। हालांकि, उनकी अपनी ही राज्य सरकार के इस सर्वे ने अब कांग्रेस को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है।
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