अडानी ग्रुप की एग्जिट का मार्केट में असर, शेयरों में आई हल्की या बड़ी गिरावट?
अडानी ग्रुप | अडानी ग्रुप के पोर्टफोलियो से शुक्रवार को एक कंपनी बाहर हो गई. दरअसल, अडानी ग्रुप ने शुक्रवार को ब्लॉक डील के जरिए AWL Agri Business (पहले अडानी विल्मर लिमिटेड) में अपनी बची हुई 7 परसेंट हिस्सेदारी बेच दी और इसके बिजनेस से पूरी तरह से बाहर निकल गई|
अडानी कमोडिटीज LLP ने किया ट्रांजैक्शन
अडानी एंटरप्राइजेज की सब्सिडियरी अडानी कमोडिटीज LLP ने यह डाइवेस्टमेंट किया है. यह भारत के सबसे बड़े एडिबल ऑयल ब्रांड फ्रेंचाइजी में अपनी पोजीशन खत्म करने के लिए ग्रुप का उठाया गया आखिरी कदम है. अडानी ग्रुप ने यह सौदा 275.50 प्रति शेयर के हिसाब से की है|
इन्वेस्टमेंट बैंक जेफ़रीज़ ने इस ट्रांजैक्शन के लिए ब्रोकर का काम किया. मार्केट के अनुमान और इंडस्ट्री के सूत्रों का कहना है कि AWL एग्री के मौजूदा मार्केट कैपिटलाइज़ेशन के आधार पर डील की वैल्यू 2,300–2,400 करोड़ के बीच होगी|
कंपनी के शेयर हुए धड़ाम
अडानी के कंपनी से निकलने के बाद ही इसके शेयरों में हलचल देखी गई. जैसे ही ब्लॉक डील के जरिए अडानी ने अपने लगभग 6.6 परसेंट शेयर बेच दिए, वैसे ही स्टॉक 3.7 परसेंट गिरकर 266.45 रुपये प्रति शेयर पर आ गया, जो इसका इंट्राडे लो था|
पहले कितना था कंपनी में हिस्सा?
पहले अडानी ग्रुप की AWL एग्री में 20 परसेंट हिस्सेदारी थी. पहले इस हफ्ते की शुरुआत में 4,646 करोड़ की ऑफ-मार्केट डील के जरिए कंपनी की 13 परसेंट हिस्सेदारी विल्मर इंटरनेशनल की एक ब्रांच को बेच दी. अब फाइनल ब्लॉक डील के कम्प्लीट होने के साथ अडानी एंटरप्राइजेज को इसके टोटल एग्जिट से 15,707 करोड़ रुपये मिले हैं|
खरीदारों में ये सभी रहे शामिल
सूत्रों ने बताया कि ICICI प्रूडेंशियल MF, SBI MF, टाटा MF, क्वांट MF, बंधन MF, वैनगार्ड और Charles Schwab जैसे घरेलू म्यूचुअल फंड बड़े खरीदारों में शामिल थे. सिंगापुर, UAE और दूसरे एशियाई मार्केट के कई ग्लोबल इन्वेस्टर ने भी क्लीन-आउट ब्लॉक में हिस्सा लिया. अडानी के बाहर निकलने के साथ सिंगापुर की विल्मर इंटरनेशनल अकेली प्रमोटर बन गई है, जिसके पास अब AWL एग्री का लगभग 57 परसेंट हिस्सा होने का अनुमान है. इससे कंपनी की पहचान एक मल्टीनेशनल फूड और FMCG प्लेयर के तौर पर मजबूत होती है|
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