बीटीसी चुनावों में BJP का टूटा 10 साल का विक्ट्री रिकॉर्ड, CM सरमा के गढ़ में लगा दी सेंध
नई दिल्ली । BTC यानी बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद (Bodoland Territorial Council) के चुनाव के नतीजे (Election results) भारतीय जनता पार्टी (BJP) की चिंता बढ़ाने वाले हो सकते हैं। चुनाव में NDA के ही दल बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट ने आधे से ज्यादा सीटें जीतकर भाजपा के दबदबे को चुनौती दी है। हालांकि, भाजपा इसे एनडीए की जीत के रूप में ही देख रही है, लेकिन एक ओर जहां BTC में पार्टी की सीटों की संख्या घटी है। वहीं, बीते करीब एक दशक से चला आ रहा विजय रथ भी थम गया है।
क्यों अहम थे चुनाव
दरअसल, बीटीसी चुनावों को साल 2026 में होने वाले विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा था। इसके अलावा खुद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा चुनावों में आक्रामक प्रचार अभियान चलाते नजर आए थे। चुनाव से पहले ही सीएम सरमा ने बीपीएफ के साथ गठबंधन का विकल्प खुला रखा था। कहा जा रहा है कि उन्होंने भाजपा विरोधी मुद्दे पर चुनाव लड़ा था।
सरमा ने कहा, मैं हाग्रामा मोहिलरी और बीपीएफ को बीटीसी चुनावों में जीत की बधाई देता हूं। बीपीएफ भी एनडीए का हिस्सा है और अब बीटीसी की सभी 40 सीटें एनडीए घटकों के पास हैं। हाग्रामा मोहिलरी मुझसे सुबह मिलने आए थे और वह एनडीए के साथ ही रहेंगे। गठबंधन में किसी तरह की कोई समस्या नहीं है और हम साथ मिलकर काम जारी रखेंगे।
साल 2016 से अब तक विधानसभा, लोकसभा और स्थानीय निकाय चुनावों में भी भाजपा को जमकर सफलता मिली थी, लेकिन बीटीसी चुनाव ने भाजपा की सीटों का ग्राफ नीचे गिरा दिया है।
क्या रहे नतीजे
हाग्रामा मोहिलरी के नेतृत्व वाले BPF ने 40 में से 28 सीट पर जीत दर्ज की। UPPL यानी यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल को 7 और भाजपा को 5 सीटें मिलीं। खास बात है कि पिछले चुनाव में UPPL को 12 और भाजपा को 9 पर जीत मिली थी। बीपीएफ 2020 के चुनावों में 17 सीट पर जीत दर्ज करके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन यूपीपीएल ने भाजपा और गण सुरक्षा पार्टी (जीएसपी) के साथ मिलकर परिषद का गठन किया था।
कौन हैं हाग्रामा मोहिलरी
बीपीएफ प्रमुख मोहिलरी पूर्व विद्रोही नेता हैं। वह विद्रोही समूह बोडोलैंड लिबरेशन टाइगर के चीफ थे। हालांकि, साल 2003 में बोडो समझौते के बाद बीटीसी की स्थापना हुई थी और तब उन्होंने राजनीति में एंट्री ली थी। साल 2003 में हथियार छोड़ने के बाद उन्होंने 2005 में बीपीएफ की स्थापना की। वह बीटीसी के पहले CEM यानी चीफ एग्जिक्यूटिव मेंबर भी बने थे। साल 2005 और 2020 के बीच उन्होंने पद पर तीन कार्यकाल पूरे किए।
2010 और 2016 विधानसभा चुनाव बीपीएफ के लिए अच्छे साबित हुए। हालांकि, साल 2020 में नेताओं के टूटकर भाजपा और UPPL में शामिल होने के चलते उन्हें सत्ता गंवानी पड़ी थी।
मोहिलरी ने कहा कि बीपीएफ किसी भी पार्टी, चाहे वह यूपीपीएल हो या भाजपा के समर्थन को अस्वीकार नहीं करेगा, अगर वे आगे आते हैं। उन्होंने कहा, ‘मैंने सुना है कि मुख्यमंत्री ने कहा है कि हम राजग के सहयोगी के रूप में साथ मिलकर काम करेंगे। हम इसका स्वागत करते हैं।’
दावा पेश किया
बीपीएफ ने रविवार को असम में अगली BTC के गठन का दावा पेश किया। मोहिलरी के नेतृत्व में बीपीएफ के नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों ने राजभवन में राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य से मुलाकात की थी। मोहिलरी को शनिवार को पार्टी की नीति-निर्धारक संस्था द्वारा सर्वसम्मति से अगली परिषद का अध्यक्ष चुना गया।
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