हनीट्रैप मामले में कमलनाथ पर नहीं होगी CBI जांच, जनहित याचिका खारिज
इंदौर। मध्य प्रदेश के चर्चित हनी ट्रैप मामले की सीडी को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ को हाई कोर्ट की इंदौर बेंच से बड़ी राहत मिली है। उनके खिलाफ दायर जनहित याचिका गुरुवार को कोर्ट ने खारिज कर दी। एडवोकेट भूपेंद्रसिंह कुशवाह द्वारा दायर याचिका में कहा गया था कि नाथ ने खुद एक साक्षात्कार में कहा था कि उनके पास हनी ट्रैप मामले की सीडी है। मांग की गई थी कि नाथ को आदेश दिया जाए कि वे सीडी एसआईटी को उपलब्ध कराएं। याचिका निरस्त करते हुए कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के आधार पर याचिका दायर की है। किसी राजनेता के राजनीतिक बयान को गंभीरता से नहीं लिया जा सकता।
साल 2023 में दायर की गई थी याचिका
याचिका में कमलनाथ पर आरोप लगाए गए हैं कि पूर्व सीएम ने कहा था कि उन्होंने हनीट्रैप से जुड़े वीडियो देखे हैं और उनके पास बीजेपी नेताओं की पैन ड्राइव भी है। इस मामले से जुड़े दस्तावेज SIT को नहीं सौंपी थी. इसके साथ ही याचिका में ये भी कहा गया है कि वे सबूत छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। इस केस में मध्य प्रदेस पुलिस, एसआईटी, पूर्व सीएम कमलनाथ और पूर्व मंत्री गोविंद सिंह को पक्षकार बनाया गया था। ये याचिका साल 2023 में दायर की गई थी।
‘मीडिया के आधार पर सबूत देना गलत’
एमपी हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता भूपेंद्र सिंह के वकील से इस बयान के तथ्यों को लेकर जानकारी मांगी। न्यायालय में याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि इस बयान के वीडियो कई मीडिया चैनल और अन्य जगह पर प्रसारित किए गए हैं। कोर्ट ने कमलनाथ के बयान की सीडी ना पेश करने को लेकर भी नाराजगी जताई। उच्च न्यायालय ने मीडिया के आधार दिए गए सबूत को गलत माना है।
‘सच्चाई को छिपा रहे हैं’
एडवोकेट भूपेंद्र सिंह ने हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी. इसमें नाथ पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने बयान दिया था कि उन्होंने हनी ट्रैप की वीडियो देखी है और उनके पास भाजपा नेताओं की पैन ड्राइव मौजूद है। लेकिन उन्होंने इस मामले की जांचकर्ता SIT को ये नहीं सौंपी थी।उनके पास इस मामले से जुड़े सबूत होने के बाद में भी वे सच्चाई को छिपा रहे हैं।
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