चीन के शंघाई और ग्वांगझू में पहलगाम हमले के शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि, प्रवासियों की भी भागीदारी
बीजिंग: चीन के शंघाई और ग्वांगझू प्रांत में भारत के जम्मू-कश्मीर राज्य के पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए भारतीयों को श्रद्धांजलि दी गई। चीन में स्थित भारतीय राजनयिक दूतावासों ने पहलगाम आतंकवादी हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए कई शोक सभाएं आयोजित कीं। इन शोक सभाओं में वाणिज्य दूतावास के अधिकारियों के साथ प्रवासी भारतीय समुदाय के सदस्य भी शामिल हुए।
पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना
उन्होंने आतंकवादी हमले में लोगों के मारे जाने पर शोक व्यक्त किया और पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। शंघाई स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास में महावाणिज्य दूत प्रतीक माथुर के नेतृत्व में शोक सभा की गई। वाणिज्य दूतावास द्वारा 30 अप्रैल को सोशल मीडिया मंच 'X' पर साझा किए गए एक पोस्ट में कहा गया, "महावाणिज्य दूत प्रतीक माथुर के नेतृत्व में भारतीय महावाणिज्य दूतावास शंघाई के अधिकारियों एवं कर्मचारियों, भारत के मित्रों और भारतीय प्रवासियों ने पहलगाम आतंकवादी हमले के पीड़ितों के प्रति वाणिज्य दूतावास में गहरी संवेदना व्यक्त की।"
पहलगाम में मारे गए थे 26 लोग
इसी तरह, ग्वांगझू स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को आतंकवादी हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए एक शोक सभा की। इस हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिनमें से अधिकतर पर्यटक थे। ग्वांगझू वाणिज्य दूतावास ने शुक्रवार को 'X' पर लिखा, "इस शोक सभा में 60 से अधिक प्रवासी भारतीय, वाणिज्य दूतावास के अधिकारी एवं उनके परिवार के सदस्य तथा भारत के मित्र शामिल हुए।" इसने कहा कि कई लोग डिजिटल माध्यम से भी शोक सभा में शामिल हुए।
10वीं-12वीं बोर्ड के विद्यार्थियों को द्वितीय अवसर परीक्षा का मिलेगा मौका : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
पश्चिम बंगाल में भाजपा के समर्थन में उतरे डॉ. मोहन यादव, जनसभा को किया संबोधित
राहुल गांधी की 6 गारंटियां: तमिलनाडु की महिलाओं और छात्रों को हर महीने मिलेंगे 2000 रुपये।
प्रशासन का सख्त एक्शन: बिना लाइसेंस चल रही चांदी रिफाइनरी सील, मौके से आधुनिक मशीनें बरामद।
ईरान की सख्ती: अब जहाजों को लेनी होगी IRGC की इजाजत
साहब की बहाली के लिए बाबू ने मांगी घूस: 40 हजार रुपये के साथ पकड़े गए स्थापना शाखा प्रभारी।
अनुभव का सम्मान या परीक्षा का दबाव? पात्रता परीक्षा पर मप्र के शिक्षकों ने खोला मोर्चा
ग्रामीणों की बहादुरी से बची दो जानें, लेकिन अंचल और पूनम को नहीं बचा सका कोई